उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य के लिए नया रेफरल ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम लागू
उत्तराखंड में मातृ स्वास्थ्य के लिए नया रेफरल ट्रैकिंग एवं मॉनिटरिंग सिस्टम लागू
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में मातृ रेफरल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल की गई है।
देहरादून: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), उत्तराखंड के मिशन निदेशक डॉ. संदीप तिवारी की अध्यक्षता में मंगलवार को "मातृ रेफरल ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग एवं ऑडिट सिस्टम" विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मातृ रेफरल प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के तरीकों पर चर्चा की गई ताकि गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सटीक और समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
बैठक की मुख्य बातें
इस महत्वपूर्ण बैठक में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए कई उपायों पर विचार हुआ। गर्भवती महिलाओं के उचित स्थिरीकरण (Stabilization) से लेकर रेफर करने एवं प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच संवाद व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सभी उपस्थित विशेषज्ञों ने रेफर की गई मातृ केसों की निगरानी और ऑडिट के लिए आवश्यक प्रलेखन की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में डॉ. अजय आर्य (निदेशक चिकित्सा शिक्षा), डॉ. रश्मि पंत (निदेशक एनएचएम उत्तराखंड), और डॉ. शिखा जंगपांगी (निदेशक राष्ट्रीय कार्यक्रम) समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
SOP का प्रस्तावित ढांचा
बैठक में प्रस्तावित SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) के तहत, रेफर की जाने वाली प्रत्येक मातृ केस के लिए एक अग्रिम संवाद प्रणाली का अनिवार्य किया जाएगा। यह प्रणाली सभी स्वास्थ्य संस्थाओं को एक पूर्व सूचना देने में मदद करेगी, जिससे वे आवश्यक तैयारियां कर सकें। साथ ही, प्रत्येक मातृ केस का ट्रैकिंग और ऑडिट होगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और मानव संसाधनों की कमियों की पहचान की जा सकेगी।
मिशन निदेशक का वक्तव्य
डॉ. संदीप तिवारी ने कहा, "गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के लिए एक मजबूत और उत्तरदायी रेफरल प्रणाली अत्यंत आवश्यक है।" उन्होंने आवश्यकता के अनुसार कार्रवाई करने और विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त सुझावों को SOP में सम्मिलित करके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
महत्व एवं लाभ
यह पहल मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारने, आपातकालीन प्रसूति सेवाओं तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने और रेफरल में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करने में सहायता करेगी। इसके अलावा, रेफरल ऑडिट के माध्यम से स्वास्थ्य प्रणाली में मौजूद कमियों की पहचान कर उन्हें दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकेंगे, जिससे मातृ मृत्यु एवं गंभीर जटिलताओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
बैठक के अंत में विशेषज्ञों द्वारा प्राप्त सुझावों के आधार पर SOP तैयार करने के निर्णय हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यह प्रणाली न केवल मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाएगी बल्कि उत्तराखंड के स्वास्थ्य ढांचे में भी सुधार लाएगी।
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टीम यंग्सइंडिया, सुमन भटनागर
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