उत्तराखंड के इस गांव में 18 दिनों से पानी का संकट: 45 साल पुरानी टंकी बनी मुसीबत

Oct 22, 2025 - 16:30
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उत्तराखंड के इस गांव में 18 दिनों से पानी का संकट: 45 साल पुरानी टंकी बनी मुसीबत
उत्तराखंड के इस गांव में 18 दिनों से पानी का संकट: 45 साल पुरानी टंकी बनी मुसीबत

उत्तराखंड के सीमांत गांव में पानी संकट: समस्या की गंभीरता

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के एक गांव में पिछले 18 दिनों से पानी की भयंकर किल्लत है। 45 वर्ष पुरानी पानी की टंकी अब गांववासियों के लिए संकट का कारण बन गई है।

जर्जर पानी की टंकी का हो रहा है रिसाव

उत्तराखंड के एक सीमांत गांव में जल संकट का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। 45 साल पुरानी पानी की टंकी अब जर्जर अवस्था में पहुंच गई है। इस वजह से यहां पानी का रिसाव हो रहा है, जो न केवल गांववासियों की आवश्यकताओं को पूरा कर पाने में असक्षम है, बल्कि इससे जल संस्थान के प्रति लोगों का गुस्सा भी बढ़ रहा है।

बोरवेल की भी स्थिति गंभीर

इस गांव में केवल पानी की टंकी ही नहीं बल्कि बोरवेल भी खराब हो गए हैं। बोरवेलों के काम न करने के कारण, गांववासी न केवल पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं, बल्कि अपने दैनिक कार्यों के लिए भी पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय, जल संस्थान की लापरवाही ने उनकी स्थिति को और भी खराब कर दिया है।

गांववासियों की आवाज

गांव के लोग अब अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने लगे हैं। उन्होंने मीडिया और अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनके समस्याओं का समाधान किया जाए। अनेकों परिवार को पानी की तलाश में दूर-दूर जाना पड़ रहा है, जिससे उनका जीवन बहुत कठिन हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्य का समाधान नहीं किया गया, तो उनका जीवन और अधिक संकट में पड़ जायेगा।

जल संस्थान की जिम्मेदारी

जल संस्थान की कर्ता-धर्ता इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं। उनकी लापरवाही के कारण, जो साफ पानी की मात्र एक टंकी थी, वह अब एक मुसीबत में बदल गई है। यदि जल संस्थान पेयजल प्रबंधन को महत्वपूर्णता नहीं दे रहा, तो इससे केवल गांववासियों को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को संकट का सामना करना पड़ेगा।

समाधान की आशा

गांववासियों ने ऐसे प्रशासनिक कदमों की उम्मीद की है, जो उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करें। यदि जल संस्थान प्रभावित हो चुका है, तो उन्हें हर हाल में तय समय पर कार्य पूर्ण करना चाहिए। सरकार और स्थानीय प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि इस समस्या का समाधान शीघ्र किया जा सके।

जल संकट से परेशान ग्रामीणों को अब इन समस्याओं का समाधान चाहिए। उनकी मांगों को सुनने और तत्कालिक कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

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टीम यंग्सइंडिया
सुमन शर्मा

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