मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को भारत सरकार की स्वीकृति

Oct 10, 2026 - 08:30
 108  2.7k
मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को भारत सरकार की स्वीकृति
मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को भारत सरकार की स्वीकृति

मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से पिटकुल की ₹3,638 करोड़ की पारेषण परियोजना को भारत सरकार की स्वीकृति

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - YoungsIndia

कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है।

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड की विद्युत पारेषण व्यवस्था को सुदृढ़ करने में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग (DEA) की 167वीं स्क्रीनिंग समिति की बैठक में पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखण्ड लिमिटेड (पिटकुल) की लगभग ₹3,638 करोड़ की परियोजना को एशियाई विकास बैंक (ADB) से ऋण वित्तपोषण के लिए प्रस्तुति हेतु स्वीकृति प्रदान की गई। यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित हुई थी, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्रालय के अपर सचिव द्वारा की गई।

मुख्यमंत्री के संघीय सहयोग

इस उपलब्धि में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का केंद्रीय नेतृत्व, विशेषकर केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ निरंतर समन्वय महत्वपूर्ण रहा। प्रमुख सचिव, ऊर्जा, उत्तराखण्ड शासन, आर. मीनाक्षी सुन्दरम ने स्क्रीनिंग समिति के समक्ष इस परियोजना का प्रस्तुतीकरण किया। उनके प्रयासों ने इस महत्वपूर्ण मंजूरी में योगदान दिया है।

परियोजना का विवरण

समिति ने 'उत्तराखण्ड क्लाइमेट रेजिलिएंट इंट्रा-स्टेट पावर ट्रांसमिशन सिस्टम डेवलपमेंट प्रोजेक्ट' (UCRISPTSDP) के अंतर्गत 255 मिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात लगभग ₹2,182 करोड़ के प्रस्तावित ADB ऋण के लिए परियोजना को स्वीकृत किया है। इस परियोजना की कुल लागत 425 मिलियन अमेरिकी डॉलर, अर्थात लगभग ₹3,638 करोड़ होगी। इसमें 60 प्रतिशत वित्तपोषण ADB ऋण के माध्यम से प्रस्तावित है, और शेष 40 प्रतिशत काउंटरपार्ट अंशदान पिटकुल एवं राज्य सरकार की पारस्परिक सहमति से किया जाएगा।

मुख्य कार्य

इस परियोजना के अंतर्गत निम्नलिखित प्रमुख कार्य प्रस्तावित हैं:

  • – 400 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 220 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 132 केवी के 03 विद्युत उपकेंद्र।
  • – 66 केवी का 01 विद्युत उपकेंद्र।
  • – विभिन्न विद्युत पारेषण लाइनों का निर्माण।
  • – संबंधित सिविल कार्य एवं परामर्श सेवाएँ।

आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ

इस परियोजना के माध्यम से कुल 10 विद्युत उपकेंद्रों और संबंधित पारेषण अवसंरचना के विकास का उद्देश्य प्रदेश की विद्युत पारेषण क्षमता, विश्वसनीयता और जलवायु संबंधी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता को बढ़ाना है। यह परियोजना प्रदेश की बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप पारेषण नेटवर्क को मजबूती प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।

भारत सरकार की स्क्रीनिंग समिति की इस स्वीकृति के बाद अब ADB द्वारा आवश्यक विस्तृत जाँच एवं मूल्यांकन—ड्यू डिलिजेंस—की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके आधार पर ADB की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऋण की अंतिम स्वीकृति संबंधी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।

इसके अतिरिक्त, यह परियोजना उत्तराखण्ड की विद्युत संरचना को न केवल अपग्रेड करेगी बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तकनीकी संरचना को सुदृढ़ करने एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के интег्रेशन के साथ, यह परियोजना, प्रदेश के विकास और स्थिरता में सकारात्मक योगदान देगी।

अधिक अपडेट के लिए, कृपया देखें: YoungsIndia

टीम यंग्सइंडिया
आर्या कुमारी

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0