एयरोडायनेमिक डिज़ाइन: तकनीकी भविष्य की ओर एक कदम बढ़ाते हुए - प्रो. संजय मित्तल

Jan 17, 2026 - 16:30
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एयरोडायनेमिक डिज़ाइन: तकनीकी भविष्य की ओर एक कदम बढ़ाते हुए - प्रो. संजय मित्तल
एयरोडायनेमिक डिज़ाइन: तकनीकी भविष्य की ओर एक कदम बढ़ाते हुए - प्रो. संजय मित्तल

एयरोडायनेमिक डिज़ाइन: तकनीकी भविष्य की ओर एक कदम बढ़ाते हुए - प्रो. संजय मित्तल

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कम शब्दों में कहें तो, आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर संजय मित्तल ने साबित किया है कि एयरोडायनेमिक डिज़ाइन केवल उड़ानों की गुणवत्ता को बेहतर नहीं बनाता, बल्कि यह देश के तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

नवीनतम तकनीकी दृष्टिकोण

देहरादून में ग्राफिक एरा ड्रीम यूनिवर्सिटी में प्रो. मित्तल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एयरोडायनेमिक डिज़ाइन सही सोच और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इसे लागू करने से न केवल विमान की दक्षता में सुधार होगा, बल्कि यह पूरे देश के तकनीकी भविष्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।

सटीक डिजाइन तकनीक का महत्व

प्रो. मित्तल ने अपनी प्रस्तुति में उल्लेख किया कि सटीक डिज़ाइन तकनीकें विमान की प्रदर्शन क्षमता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाती हैं। उन्होंने एयरोडायनामिक शेप ऑप्टिमाइजेशन से संबंधित कई अहम अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा की। उनके विचार में, एक प्रभावशाली डिजाइन केवल तकनीकी दक्षता ही नहीं, बल्कि संसाधनों की बेहतर उपयोगिता भी सुनिश्चित करता है।

आधुनिक तकनीकों का योगदान

प्रो. मित्तल ने एयरफॉइल्स और विंग्स के डिज़ाइन में कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स, आधुनिक कम्प्यूटेशनल टूल्स, ऑप्टिमाइजेशन तकनीकों और फिजिक्स आधारित मॉडलिंग की महत्ता को स्पष्ट किया। यह तकनीकें न केवल डिज़ाइन प्रक्रिया को सरल बनाती हैं बल्कि उनकी सटीकता और दक्षता को भी बढ़ाती हैं, जिससे उड़ानों की सुरक्षा और प्रदर्शन में सुधार होता है।

कार्यक्रम का आयोजन

यह सत्र ग्राफिक एरा ड्रीम यूनिवर्सिटी के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर जोशी, डॉ. विजय पाटीदार, डॉ. कुमार गौरव, डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, डॉ. चंद्र किशोर और अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्रों की उपस्थिति ने इसे सफल बनाया। इस तरह के ज्ञानवर्धक सत्रों से छात्रों को न केवल प्रायोगिक ज्ञान मिलता है, बल्कि उन्हें नवीनतम तकनीकी विकास के प्रति भी जागरूक किया जाता है।

निष्कर्ष

प्रो. संजय मित्तल के विचार और सुझाव देश के तकनीकी विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। एयरोडायनेमिक डिज़ाइन पर उनका जोर हमें बताता है कि भविष्य की उड़ानें किस तरह से अधिक सुरक्षित और सक्षम हो सकती हैं। छात्रों को इस प्रकार के ज्ञान से लैस करने से ना केवल वे सफल इंजीनियर्स बनेंगे, बल्कि देश को भी तकनीकी क्षेत्र में मजबूत बनाएंगे।

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टीम यंग्सइंडिया, दीक्षा शर्मा

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