स्व. इन्द्रमणी बडोनी के 100वें जन्मदिवस पर देवप्रयाग महाविद्यालय में भव्य गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन

Dec 24, 2025 - 16:30
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स्व. इन्द्रमणी बडोनी के 100वें जन्मदिवस पर देवप्रयाग महाविद्यालय में भव्य गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन
स्व. इन्द्रमणी बडोनी के 100वें जन्मदिवस पर देवप्रयाग महाविद्यालय में भव्य गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन

स्व. इन्द्रमणी बडोनी के 100वें जन्मदिवस पर देवप्रयाग महाविद्यालय में भव्य गढ़वाली-कुमाऊंनी कवि सम्मेलन

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कम शब्दों में कहें तो, देवप्रयाग के ओंकारानंद सरस्वती राजकीय महाविद्यालय में स्व. इन्द्रमणी बडोनी के 100वें जन्मदिवस पर एक खास कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन प्रभारी प्राचार्य डॉ. एम एन नौडियाल ने किया, जहां गढ़वाली और कुमाऊंनी साहित्य के नामी कवियों ने अपने विचार और काव्य पाठ का कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

कवि सम्मेलन का आयोजन

इस विशेष अवसर पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्थानीय साहित्य प्रेमियों की एक बड़ी संख्या मौजूद थी। कवि सम्मेलन में कई प्रतिष्ठित कवियों ने भाग लिया, जिन्होंने गढ़वाली और कुमाऊंनी भाषा में अपने अद्भुत काव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर कवियों ने अपने लेखन के माध्यम से स्व. इन्द्रमणी बडोनी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्व. इन्द्रमणी बडोनी का योगदान

स्व. इन्द्रमणी बडोनी, जो कि एक प्रसिद्ध गढ़वाली कवि और साहित्यकार थे, ने अपने साहित्य के माध्यम से गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका लेखन न केवल गढ़वाली भाषा को समृद्ध करने का कार्य करता है बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक मामलों पर भी गहराई से प्रकाश डालता है। उनकी रचनाओं में स्थानीय लोगों की भावनाएँ और संघर्ष स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं।

साहित्यिक माहौल में समृद्धि

कार्यक्रम के दौरान, स्थानीय कवियों द्वारा विभिन्न विषयों पर प्रभावशाली कविताएँ पेश की गईं। इन कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन ने न केवल साहित्य के प्रति जागरूकता फैलाई, बल्कि युवा कवियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक प्लेटफार्म भी प्रदान किया। यही नहीं, इस आयोजन ने समुदाय में एकजुटता और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का भी कार्य किया।

संस्कृति के संरक्षण की दिशा में कदम

साहित्यिक आयोजनों का महत्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने में अत्यधिक बढ़ जाता है। कार्यक्रम के दौरान कई प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित किया जाना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों के प्रति जागरूक किया जा सके। इस प्रकार के साहित्यिक समारोह संस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन में सहायक सिद्ध होते हैं।

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय प्रशासन, आयोजक मंडल, और सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया गया। सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि ऐसे आयोजन आगे भी होते रहने चाहिए।

अंत में, इस कवि सम्मेलन ने स्व. इन्द्रमणी बडोनी की सोच और दृष्टिकोण को फिर से जीवंत कर दिया है। महाविद्यालय की इस पहल ने सांस्कृतिक और साहित्यिक ज्ञान के प्रवाह को बढ़ावा देने का कार्य किया है।

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टीम यंग्सइंडिया - निशा मित्तल

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