विशाल चतुर्वेदी का कैंची धाम दौरा: ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक ने बाबा नीब करौरी महाराज के दरबार में लगाई हाजिरी

Sep 13, 2026 - 00:30
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विशाल चतुर्वेदी का कैंची धाम दौरा: ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक ने बाबा नीब करौरी महाराज के दरबार में लगाई हाजिरी
विशाल चतुर्वेदी का कैंची धाम दौरा: ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक ने बाबा नीब करौरी महाराज के दरबार में लगाई हाजिरी

विशाल चतुर्वेदी का कैंची धाम दौरा: ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक ने बाबा नीब करौरी महाराज के दरबार में लगाई हाजिरी

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कम शब्दों में कहें तो, फिल्म ‘हनुमान अंश’ के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने शनिवार को कैंची धाम का दौरा किया, जहां उन्होंने बाबा नीब करौरी महाराज के दर्शन किए और करीब एक घंटे तक मंदिर में पूजा-अर्चना की।

कैंची धाम: एक आध्यात्मिक स्थल

कैंची धाम, उत्तराखंड राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जहां भक्तिभाव के साथ हर वर्ष हजारों श्रद्धालु आते हैं। बाबा नीब करौरी महाराज का यह धाम उनके अनुयायियों के लिए एक विशेष स्थान रखता है। विशाल चतुर्वेदी का यह दौरा उनके लिए न केवल एक आध्यात्मिक यात्रा थी, बल्कि इसको लेकर उनके विभिन्न विचार भी सामने आए हैं।

‘हनुमान अंश’ का महत्त्व

फिल्म ‘हनुमान अंश’ जिसे लेकर देशभर में चर्चा हो रही है, हिंदू पौराणिक कथाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई है। इसमें जवाबदेही, निष्ठा और साहस का संदेश है। इस फिल्म का निर्देशन करते हुए, डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने न केवल एक बेहतरीन कहानी को पेश किया है, बल्कि विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर भी प्रकाश डाला है।

विशाल चतुर्वेदी का अनुभव

कैंची धाम में विश्राम के दौरान जब हमारे संवाददाता ने डॉ. चतुर्वेदी से बातचीत की, तो उन्होंने कहा, "यहां आकर एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव हुआ। बाबा के दरबार में समय बिताकर प्रेरणा मिली है।" उनके इस बयान ने दर्शकों के लिए एक संदेश छोड़ा कि आस्था और कला का मेल किसी भी विचार को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

समाज में आध्यात्मिक जागरूकता

फिल्म ‘हनुमान अंश’ और इस जैसे कई अन्य प्रयास सामाजिक जागरूकता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। आज के समय में जब तोड़फोड़ और नकारात्मकता की बाढ़ आ रही है, ऐसे में आध्यात्मिकता के माध्यम से लोगों में सकारात्मकता का संचार करना आवश्यक है। डॉ. चतुर्वेदी जैसे फिल्म निर्माता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

निष्कर्ष

कैंची धाम का दौरा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसा पल था जिसने डॉ. विशाल चतुर्वेदी को उनके कला के प्रति उनकी जिम्मेदारियों का अहसास दिलाया। हम सभी को चाहिए कि हम भी अपने जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाएं और इसे अपने कार्यों के माध्यम से आगे बढ़ाएं।

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टीम यंग्सइंडिया, दीक्षा शर्मा

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