नैनीताल में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा! 2 गुलदार की खाल और हड्डियों के साथ तस्कर गिरफ्तार

Jan 10, 2026 - 08:30
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नैनीताल में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा! 2 गुलदार की खाल और हड्डियों के साथ तस्कर गिरफ्तार
नैनीताल में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा! 2 गुलदार की खाल और हड्डियों के साथ तस्कर गिरफ्तार

नैनीताल में वन्यजीव तस्करी का बड़ा खुलासा! 2 गुलदार की खाल और हड्डियों के साथ तस्कर गिरफ्तार

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कम शब्दों में कहें तो उत्तराखंड के नैनीताल में वन्यजीव तस्करी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश हुआ है, जहां तस्कर को दो गुलदार की खाल और उनके 6 माह पुराने हड्डियों के साथ गिरफ्तार किया गया है।

घटनास्थल और तस्कर की पहचान

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में वन विभाग ने तस्करी के इस मामले में बागेश्वर के कपकोट निवासी महेश सिंह कपकोटी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार तस्कर के पास से मिली गुलदार की खालें और हड्डियों ने वन विभाग को इस संपूर्ण अपराध की गहराई को समझने में सहायता की।

तस्करी का मामला और जांच की स्थिति

वन विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तस्कर के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का फैसला किया है। तस्कर की गिरफ्तारी के बाद, वन विभाग और विशेष कार्य बल (एस.टी.एफ.) ने विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है। स्थानीय वन अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। यह जांच की जा रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े तस्करी रैकेट का हिस्सा था या नहीं।

गुलदार और संरक्षण कानून

गुलदार जैसे वन्यजीवों की तस्करी भारतीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संधियों के विरुद्ध है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत ये जीव संरक्षित हैं, और इनकी तस्करी करने वाले व्यक्तियों पर सख्त दंड लगाया जा सकता है। इस विशेष मामले ने एक बार फिर से तस्करी के मुद्दे को उजागर किया है, जो न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र में भी असंतुलन पैदा करता है।

आगे की कार्रवाई

महेश सिंह कपकोटी की गिरफ्तारी के बाद, वन विभाग और एस.टी.एफ. की टीमें उसकी सम्पर्क सूची और बाकी सहयोगियों की पहचान के लिए काम कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जिन क्षेत्रों में गुलदारों का सामर्थ्य है, वहां तस्करी के अन्य रैकेट का भी पर्दाफाश किया जा सकेगा।

समाज के अनुकूलन पर प्रभाव

वन्यजीवों की तस्करी के खिलाफ यह कदम विभिन्न समुदायों में जागरूकता फैलाने के लिए आवश्यक है। वन्यजीवों की रक्षा के लिए स्थानीय जनसंख्या को सजग और सक्रिय बनाना होगा। इस मामले में लोगों को वन्यजीवों के संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।

अंततः, यह मामला न सिर्फ नैनीताल बल्कि पूरे उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण के प्रति सजगता लाने का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके नतीजे से वन्यजीवों के संरक्षण में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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टीम यंग्सइंडिया, साक्षी गुप्ता

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