दून की भूमि अतिक्रमण उन्मूलन: 12 विभागों को नोटिस, आवश्यक है पॉलीगॉन मैपिंग
दून की भूमि अतिक्रमण उन्मूलन: 12 विभागों को नोटिस, आवश्यक है पॉलीगॉन मैपिंग
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून में सरकारी परिसंपत्तियों की सीमा निर्धारण के लिए पॉलीगॉन मैपिंग अनिवार्य की गई है, जिससे अतिक्रमण के मामलों को खत्म किया जा सके। लापरवाही बरतने पर 12 विभागों को नोटिस भेजा गया है।
सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता
देहरादून शहर में पिछले कुछ वर्षों में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की समस्या बढ़ती जा रही है। ताकि इन परिसंपत्तियों के अधिकार और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकें, राज्य सरकार ने यूके-जीएएमएस पोर्टल पर पॉलीगॉन मैपिंग को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम अधिकारियों की जवाबदेही को एक नई दिशा देने के लिए उठाया गया है।
पॉलीगॉन मैपिंग का महत्व
पॉलीगॉन मैपिंग न केवल सरकारी संपत्तियों की सीमाओं का सही निर्धारण करती है, बल्कि इसमें यह भी सुनिश्चित करती है कि अतिक्रमण के मामले समय पर रोके जाएं। इससे न केवल राजस्व की हानि रोकी जा सकेगी, बल्कि कानून व्यवस्था भी बेहतर होगी।
12 विभागों को नोटिस जारी
सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 12 विभागों को पॉलीगॉन मैपिंग में लापरवाही के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। यह नोटिस उन विभागों पर लागू होंगे जिन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर यह मैपिंग पूरी नहीं की। राज्य सरकार ने इस कार्य में देरी को गंभीरता से लिया है और अधिकारियों से जवाब मांगा है।
अधिकारियों की जवाबदेही
इस मामले में अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। यदि कोई अधिकृत व्यक्ति लापरवाही करता हुआ पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। इससे यह संदेश जाता है कि सरकार सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है।
निष्कर्ष
देहरादून में सरकारी भूमि के अतिक्रमण को समाप्त करने के लिए उठाए गए कदम निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम लाने की अपेक्षा करते हैं। यह समय है कि सभी संबंधित विभाग गंभीरता से अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं और सरकारी संपत्तियों की रक्षा के लिए एकजुट होकर काम करें।
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टीम यंग्सइंडिया
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