उत्तराखंड में सीबकथोर्न की खेती: हिमालयी किसानों के लिए नए अवसर

Jan 5, 2026 - 16:30
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उत्तराखंड में सीबकथोर्न की खेती: हिमालयी किसानों के लिए नए अवसर
उत्तराखंड में सीबकथोर्न की खेती: हिमालयी किसानों के लिए नए अवसर

उत्तराखंड में सीबकथोर्न की खेती: हिमालयी किसानों के लिए नए अवसर

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। प्रदेश सरकार का मानना है कि यह पहल स्थानीय किसानों की आमदनी में सुधार लाएगी।

देहरादून: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में औषधीय गुणों से भरपूर सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार ने इस योजना को लागू करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, जिससे न केवल कृषिकर्ताओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि इस पौधे की औषधीय उपयोगिता का भी फ़ायदा होगा।

सीबकथोर्न: एक प्राकृतिक संपदा

सीबकथोर्न एक ऐसा पौधा है, जो अपने फल, पत्तियों और यहाँ तक कि टहनियों के लिए भी जाना जाता है। इसके फल में भरपूर मात्रा में विटामिन C, E, और अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। इसका उपयोग न केवल खाद्य उत्पादों में किया जाता है, बल्कि इसके औषधीय गुणों के कारण इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं में भी होता है।

किसानों को मिलेगा लाभ

सरकार की योजना के अनुसार, सीबकथोर्न की खेती करने वाले किसानों को न केवल सीधे आर्थिक लाभ होगा, बल्कि उन्हें बेहतर कृषि तकनीक और मार्केटिंग में भी सहायता प्रदान की जाएगी। किसानों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा कि कैसे वह इस पौधे की सही देखभाल कर सकते हैं और इसके फल का अधिकतम उपयोग कैसे कर सकते हैं।

स्थानीय बाजारों में बढ़ेगा दाम

सीबकथोर्न की खेती में वृद्धि होने से स्थानीय बाजारों में इसकी मांग भी बढ़ेगी, जिससे किसानों को अधिक आय प्राप्त होगी। इसके फल औषधीय उत्पादों के साथ-साथ स्वास्थ्य पूरक के रूप में भी बिकेंगे, जिससे कृषिकर्ताओं के लिए नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे।

आर्थिक विकास की दिशा में एक कदम

सीबकथोर्न की खेती को बढ़ावा देने से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देगा। इस पौधे की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद कर सकता है।

इस प्रकार, उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक अवसर पैदा करेगा, बल्कि यह पूरे प्रदेश के आर्थिक विकास में भी योगदान देगा।

इसके अलावा, इस पहल के माध्यम से पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं को भी स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्हें सीबकथोर्न से विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर अपनी आजीविका कमाने का मौका मिलेगा।

युवाओं को जोड़ने के लिए भी यह खेती का एक प्रोजेक्ट बन सकता है, जिसमें वे वैज्ञानिक अनुसंधान करके सीबकथोर्न की अन्य लाभकारी उपयोगिता की खोज कर सकते हैं।

आखिरकार, यह योजना न केवल हिमालयी क्षेत्र के किसानों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए भी एक आशा की किरण है।

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टीम यंग्सइंडिया, स्नेहा शर्मा

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