उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' - मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐतिहासिक सुशासन

Jan 18, 2026 - 16:30
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उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' - मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐतिहासिक सुशासन
उत्तराखंड में 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' - मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का ऐतिहासिक सुशासन

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कम शब्दों में कहें तो, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्त्व में उत्तराखंड सरकार का 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम सुशासन का अद्वितीय उदाहरण बन चुका है। 17 जनवरी 2026 तक के आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि सरकार न सिर्फ समस्या समाधान में प्रमुखता दे रही है, बल्कि नागरिकों के बीच त्रुटिहीन संचार स्थापित कर रही है।

Governance initiative image

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शुरू हुआ 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' कार्यक्रम, नागरिकों को संवेदनशील और जवाबदेह शासन की समझ के साथ जोड़ा है। यह कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए, उन तक सीधा लाभ पहुंचाने का काम कर रहा है। 17 जनवरी 2026 के आंकड़े इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि सरकार प्रभावी और संवेदनशील तरीके से कार्रवाई कर रही है।

राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के तहत 383 शिविर स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें से आज 18 शिविर का आयोजन हो रहा है, और कुल मिलाकर 381 शिविरों में 3,07,705 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया है। यह दर्शाता है कि लोगों का विश्वास सरकार की जन-केंद्रित नीतियों पर है।

इस कार्यक्रम के माध्यम से, कुल 31,288 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 21,047 का सफल निस्तारण किया गया है। वहीं, आज केवल 1,556 शिकायतों का समाधान किया गया है। यह प्रशासनिक सक्रियता और विभागीय समन्वय का प्रत्यक्ष संकेत है।

इसके अलावा, विभिन्न प्रमाण पत्रें जैसे जाति, निवास, आय अदी के 42,116 प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। आज के शिविरों में ही 2,417 प्रमाण पत्र नागरिकों को प्रदान किए गए। यह प्रक्रिया सरकारी दफ्तरों में जाने की आवश्यकता को समाप्त कर नागरिकों को राहत प्रदान कर रही है।

सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए 1,67,940 से अधिक नागरिकों को लाभ मिल चुका है, जिनमें 9,701 नए लाभार्थी शामिल हैं। यह सुनिश्चित करता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में योजनाओं का एक्सेस सीधे नागरिकों के हाथों में है।

राज्य के सभी जिलों में कार्यक्रम की सफलता दिख रही है, विशेषकर हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और अल्मोड़ा में। यहाँ नागरिकों ने व्यापक रूप से शिविरों का हिस्सा बनकर अपनी समस्याओं का समाधान पाया है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, इस कार्यक्रम ने सरकारी फैसलों और नागरिकों के बीच एक मजबूत भरोसे का पुल तैयार किया है। यह राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वे नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता देकर त्वरित और निष्पक्ष समाधान के लिए काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने साबित किया है कि सुशासन का मतलब केवल नीतियाँ बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर लागू करना और उनके परिणाम दिखाना है। 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' अभियान उत्तराखंड की एक नई पहचान बन चुका है, जो विश्वास और सक्रियता के माध्यम से एक आदर्श शासन मॉडल के रूप में उभरा है।

राज्य की इस पहल की और अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

इस अभियान की ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ, उत्तराखंड प्रदेश भविष्य में भी विकास एवं नागरिक सेवा में एक नया अध्याय जोड़ने के लिए तैयार है।

टीम यंग्सइंडिया, लेखिका: साक्षी रावत

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