उत्तराखंड की विकसित तस्वीर: स्वतंत्रता सैनानी के गांव की दुर्दशा और प्रशासन की पोल
उत्तराखंड की विकसित तस्वीर: स्वतंत्रता सैनानी के गांव की दुर्दशा और प्रशासन की पोल
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले के ल्वेगढ़ गांव की स्थिति अत्यंत दयनीय है। यहां तक कि स्वतंत्रता सैनानी शिव सिंह सजवान का गांव भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। आप सोच रहे होंगे, क्या आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे गांव इस हालात में हैं? आइए जानते हैं इस गांव की खस्ता हालात और इसके पीछे की सच्चाई।
ल्वेगढ़ गांव का इतिहास
ल्वेगढ़, एक ऐसा गांव जो कभी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा रहा, आज बुनियादी आवश्यकताओं से महरूम है। स्वतंत्रता सेनानी शिव सिंह सजवान, जिनका नाम इस गांव से जुड़ा हुआ है, ने अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण दिन इसी गांव में बिताए। लेकिन समय के साथ, विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।
बुनियादी सुविधाओं की कमी
गांव के निवासी पानी, सड़कों और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी से त्रस्त हैं। यहां के लोगों को रोजमर्रा की ज़िंदगी में अनेक कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। गांववासियों ने बताया कि कई वर्षों से वे प्रशासन के सामने अपनी समस्याएँ उठाते आ रहे हैं, लेकिन उनके मुद्दे कभी प्राथमिकता नहीं बन पाए।
स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा
ल्वेगढ़ गांव में स्वास्थ्य सेवाओं का तो यह आलम है कि गांव वालों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी कई किलोमीटर यात्रा करनी पड़ती है। नजदीकी अस्पतालों में संसाधनों की कमी के चलते गंभीर बीमारियों का इलाज भी समय पर नहीं हो पाता। इस कारण गांववालों की सेहत पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
पलायन की समस्या
विकास की अनुपस्थिति के कारण कई लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर चुके हैं। युवा पीढ़ी गांव की समस्याओं से सम faced करने के बजाय बेहतर जीवन की तलाश में अन्य स्थानों पर जा रही है। यह पलायन गांव के सामाजिक ढांचे को भी कमजोर कर रहा है।
राज्य सरकार की वादाखिलाफी
राज्य सरकार द्वारा किए गए विकास के दावों की जमीनी हकीकत केवल खोखले नजर आ रहे हैं। जबकि सरकार का विकास का नारा चमचमाते होर्डिंग्स में दिखता है, वहीं गांव के वास्तविक हालत इसके विपरीत हैं। प्रशासन को इन मुद्दों की गंभीरता को समझना आवश्यक है।
आगे क्या?
ल्वेगढ़ गांव की स्थिति एक जागरूकता का संकेत है, जो हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या विकास केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है? गांवों की दशा को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रशासन को चाहिए कि वह इन गांवों के विकास में सक्रिय रूप से भागीदारी निभाए।
उत्तराखंड के विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए यह चिंतन जरूरी है कि क्या हम अपने देश के प्रत्येक नागरिक की बुनियादी आवश्यकता की अनदेखी कर सकते हैं? किसी भी समाज के विकास का सही माप इसी में है कि वह अपने कमजोर वर्गों को कितना महत्वपूर्ण मानता है।
आखिरकार, केवल पक्की सड़कें और सुविधाएँ ही विकास नहीं हैं। हमारे गांवों की प्राथमिक आवश्यकता को समझकर सुधारात्मक कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है।
हम आशा करते हैं कि प्रशासन जल्द ही ल्वेगढ़ गांव जैसे ग्रामीण इलाकों के विकास के लिए आवश्यक कदम उठाएगा। यहां के निवासियों को उनके अधिकार और सुविधाएँ मिलेंगी।
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टीम यंग्सइंडिया
संगीतिका शर्मा
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