हल्द्वानी : देहदान का संकल्प लेकर मानवता को नई दिशा देने वाले प्रो. (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल बने प्रेरणा का स्रोत
हल्द्वानी : देहदान का संकल्प लेकर मानवता को नई दिशा देने वाले प्रो. (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल बने प्रेरणा का स्रोत
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कम शब्दों में कहें तो, प्रोफेसर (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल ने देहदान का संकल्प लेकर न केवल मानवता को नई दिशा दी है, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों को भी एक नई पहचान दी है।
प्रो. (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल: एक प्रेरणास्रोत
हल्द्वानी के प्रतिष्ठित प्रोफेसर (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल ने देहदान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने जीवन के बाद अपने शरीर को दान करने का संकल्प लिया है, जोकि न केवल चिकित्सीय शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि समाज में भी जागरूकता फैलाने का कार्य करेगा।
मानवता की सेवा में योगदान
उनका यह कदम मानवीय मूल्यों, सामाजिक चेतना और वैज्ञानिक सोच को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्य है। प्रो. (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल का मानना है कि विज्ञान और मानवता का संबंध गहरा है, और इस संबंध को मजबूती प्रदान करने के लिए देहदान जैसे कदम उठाने की आवश्यकता है।
शपथ पत्र का भरना
प्रो. (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल ने विधिवत शपथ पत्र भरते हुए मेडिकल कॉलेज, हल्द्वानी तथा दून मेडिकल कॉलेज को अपने इस इस पाठ को साझा करते हुए समाज के लोगों को प्रेरित किया। वे अपने कार्यों के माध्यम से विशेषकर युवा पीढ़ी को यह संदेश देना चाहते हैं कि जीवन के बाद भी हम किस प्रकार दूसरों के काम आ सकते हैं।
समाजिक चेतना का संचार
इस पहल ने न केवल चिकित्सा क्षेत्र में बल्कि सम्पूर्ण समाज में एक नई हलचल पैदा की है। देहदान की आवश्यकता और महत्व को समझते हुए अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम
प्रोफेसर (डॉ.) राकेश चंद्र रयाल का दृष्टिकोण अद्वितीय है; उनकी सोच और कार्य हमेशा उनके छात्रों और समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। अब, जब उन्होंने देहदान करने का संकल्प लिया है, इससे उनकी प्रेरणा में और भी वृद्धि हुई है। समाज उनके उदाहरण को अपनाकर सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
उनकी अनुसरण करने से लोगों में न केवल देहदान का परिचय मिलेगा, बल्कि वे इस दिशा में जागरूकता भी बढ़ा सकेंगे।
इसकी साधारणता और निस्वार्थ भावना समाज को यह सिखाती है कि एक व्यक्ति का योगदान भी लाखों की जिंदगी में बदलाव ला सकता है।
उनकी इस पहल ने एक नई सोच को जन्म दिया है, जिससे उम्मीद की जाती है कि अधिक से अधिक लोग इस दिशा में अपने कदम बढ़ाएं।
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टीम यंग्सइंडिया, अनुष्का राठौर
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