नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव: सीएम धामी ने मांगा प्रदेश की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

Sep 23, 2026 - 00:30
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नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव: सीएम धामी ने मांगा प्रदेश की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद
नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव: सीएम धामी ने मांगा प्रदेश की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

नैनीताल में मां नंदा-सुनंदा महोत्सव: सीएम धामी ने मांगा प्रदेश की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल में संपन्न हुआ माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ नंदा-सुनंदा की आरती की, वहीं उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। महोत्सव के माध्यम से धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

महामंत्री के समर्पित संदेश

नैनीताल के प्रसिद्ध नैना देवी मंदिर परिसर में आयोजित इस विशेष महोत्सव में मुख्यमंत्री ने माँ नंदा-सुनंदा के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। उन्होंने मां की आरती के दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की और स्थानीय लोगों का आभार व्यक्त किया। "माँ नंदा और सुनंदा की शक्तियों से प्रदेश की सभी कठिनाइयाँ दूर होंगी," सीएम धामी ने कहा।

संस्कृति और परंपरा का उत्सव

सीएम धामी ने इस महोत्सव को उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर के उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, "उत्तराखंड की पहचान हमारे रिवाज, हमारी भक्ति और हमारी संस्कृति में निहित है।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस महोत्सव के माध्यम से उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का सरकार का उद्देश्य है।

स्थानीय उत्पाद और स्वरोजगार

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। यह केवल हमारी आर्थिक वृद्धि में योगदान नहीं देगी, बल्कि हमें अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का भी अवसर देगी।" महिला स्वरोजगार पर भी उन्होंने खास ध्यान दिया, यह बताते हुए कि सरकार इस दिशा में कई योजनाएं शुरू कर चुकी है।

युवाओं के लिए रोजगारी के अवसर

सीएम धामी ने युवाओं के लिए रोजगार अवसरों को विकसित करने पर सरकार की प्राथमिकता को दोहराया। उन्होंने कहा, "हमारे युवा प्रदेश का भविष्य हैं और उनके लिए रोजगार के अवसर सृजित करना हमारी जिम्मेदारी है।" इस दिशा में क्या प्रयास किए जा रहे हैं, इसे स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने कौशल विकास और प्रशिक्षण केंद्रों को स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया है ताकि युवा अपने कौशल को निखार सकें।

मिशन "विकास भी और विरासत भी"

उन्होंने "विकास भी और विरासत भी" के मंत्र के साथ देवभूमि के विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की बात की। "हम सिर्फ विकास नहीं देख सकते, हमें अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी बनाए रखना होगा," उन्होंने कहा।

सीएम धामी के उद्बोधन से प्रदेशवासियों में उत्साह और उमंग देखने को मिला। स्थानीय लोगों ने भी इस महोत्सव का सक्रिय भाग लेते हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस महोत्सव ने न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह सामुदायिक जुड़ाव और स्थानीय संस्कृति के संरक्षण का एक प्रमुख तरीका भी था।

आगामी वर्षों में भी ऐसे महोत्सवों के आयोजन से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जीवित रखने में मदद मिलेगी, जो हमें अपने अतीत से जोड़कर रखेगी।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि माता नंदा-सुनंदा महोत्सव ने नैनीताल की भूमि को भक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और सामुदायिक एकता की मिसाल पेश की। आने वाले समय में भी ऐसे आयोजन उत्तराखंड की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगें।

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टीम यंग्सइंडिया, दीप्ति शर्मा

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