देहरादून समाचार: अधिकारियों को अपनी और परिवार की संपत्ति का ब्योरा देने के निर्देश
देहरादून: अधिकारियों को संपत्ति का ब्योरा देने के नए निर्देश
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी और परिवार की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा देने का आदेश दिया गया है। यह निर्णय उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद लिया गया है।
संपत्ति का ब्योरा देने की समय सीमा
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपनी और अपने परिवार की सभी चल और अचल संपत्तियों का विवरण प्रस्तुत करें। अनुमानित समयसीमा 15 दिसंबर है, जिसमें सभी विभागाध्यक्षों और सचिवों को अपने अधीन काम कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति का ब्योरा कार्मिक विभाग को भेजना होगा।
आदेश का संक्षिप्त विवरण
इस आदेश को गुरुवार को सचिव कार्मिक शैलेश बगौली द्वारा जारी किया गया। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के चलते यह कदम उठाया गया है, जिसके तहत अधिकारियों को पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपनी संपत्तियों की जानकारी साझा करनी होगी। बगौली के अनुसार नियुक्ति के समय से लेकर अब तक की सभी ब्योरा एकत्र करना आवश्यक है।
संपत्ति विवरण देने का महत्व
यह आदेश सरकारी पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ऐसा किया जाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के पास कोई असामान्य संपत्ति या संपत्ति जानकारी ना हो। इस प्रक्रिया के माध्यम से भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और नीतिगत अनुशासन को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
सरकार का स्टैंड
सरकारी प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संपत्ति की जानकारी प्रदान करना अनिवार्य है। यह न केवल सरकार की पारदर्शिता को बढ़ाएगा, बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि सभी सरकारी कर्मचारी नियमों का पालन कर रहे हैं। इसके माध्यम से सरकारी तंत्र में होने वाली भष्टाचार की जांच की जा सकेगी।
अगले कदम और प्रतिक्रिया
अधिकारियों को दिए गए इस आदेश पर विभिन्न विभागों की प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ अधिकारी इसे सकारात्मक कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अपने निजी जीवन में हस्तक्षेप के रूप में देख रहे हैं। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, यह देखना दिलचस्प होगा कि अधिकारी इस निर्णय का कैसे पालन करते हैं।
फिर भी, इस आदेश के तहत सभी विभागों को अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की संपत्ति की जानकारी जल्दी और सटीकता से प्रस्तुत करनी होगी। उच्च न्यायालय की सख्ती के चलते सरकार भी इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के प्रति गंभीर नजर आ रही है।
अंततः, यह देखा जाना चाहिए कि इस प्रक्रिया का क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या सरकारी कर्मचारी संपत्तियों की जानकारी सही ढंग से प्रस्तुत कर पाएंगे या नहीं।
फिर से कहें तो, सरकारी पारदर्शिता के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें.
टीम यंग्सइंडिया, प्रियंका शर्मा
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