समान नागरिक संहिता का प्रभावी क्रियान्वयन: सीएम धामी का महत्वपूर्ण संबोधन
समान नागरिक संहिता का प्रभावी क्रियान्वयन: सीएम धामी का महत्वपूर्ण संबोधन
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कम शब्दों में कहें तो: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिमालयन कल्चरल सेंटर में 'समान नागरिक संहिता दिवस' कार्यक्रम में भाग लिया और इसकी सराहना की। उन्होंने यूसीसी को लागू करने में योगदान देने वाले सभी को सम्मानित किया।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हिमालयन कल्चरल सेंटर गढ़ी कैंट में आयोजित 'समान नागरिक संहिता दिवस' को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने इस कानून को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कमेटी के सदस्यों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा पंजीकरण में योगदान देने वाले वॉलंटियरों को सम्मानित किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने यूसीसी से संबंधित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 'आज का दिन उत्तराखंड राज्य के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित रहेगा'। उन्होंने बताया कि आज के दिन समान नागरिक संहिता लागू की गई है, जिससे समाज में सामाजिक न्याय और समानता सुनिश्चित हो सकी है। उन्होंने सनातन संस्कृति का उदाहरण देते हुए बताया कि यह संस्कृति हमेशा से समरसता और समानता का प्रतीक रही है।
समान नागरिक संहिता: संविधान निर्माताओं का संकल्प
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर समेत सभी संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता को संविधान के अनुच्छेद 44 में सम्मिलित किया था। उनका मानना था कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना चाहिए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में इसे लागू करने का संकल्प लिया।
महिला सशक्तिकरण और सामाजिक समानता का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूसीसी के लागू होने से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिले हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण का एक नया युग शुरू हुआ है। इससे उत्तराखंड की मुस्लिम बहन-बेटियाँ अब हलाला और तीन तलाक जैसी कुरीतियों से मुक्त हो गई हैं। उन्होंने कहा कि 'यह कानून न केवल मुस्लिम महिलाओं के लिए बल्कि सभी नागरिकों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित करता है।'
समाज में समरसता की स्थापना का प्रयास
सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि समान नागरिक संहिता किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह समाज की कुप्रथाओं को मिटाकर समरसता स्थापित करने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह कानून विवाह, विवाह-विच्छेद और उत्तराधिकार आदि से संबंधित नियमों को एक समान बनाता है।
समान नागरिक संहिता का प्रभावी क्रियान्वयन
मुख्यमंत्री ने गर्व से कहा कि उन्होंने इस कानून को केवल घोषणा न करके धरातल पर लागू किया है। एक साल में विवाह पंजीकरण की संख्या औसतन 1400 तक पहुंच गई है, जो पहले केवल 67 थी। इसके अलावा, यूसीसी के तहत लगभग 5 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनका निस्तारण 95 प्रतिशत किया जा चुका है।
विवाह में धोखाधड़ी पर सख्त प्रावधान
हाल ही में राज्य सरकार ने यूसीसी में आवश्यक संशोधनों की मंजूरी दी है, जिससे विवाह में धोखाधड़ी करने पर प्रावधान स्पष्ट किए गए हैं। विवाह और लिव-इन संबंधों में किसी भी प्रकार का बल, दबाव या धोखाधड़ी के लिए कठोर सजा का प्रावधान सुनिश्चित किया गया है।
मजबूत फैसले, देश को जोड़ते हैं
सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह साबित हुआ है कि मजबूत फैसले देश को जोड़ते हैं। इस कानून से कुछ लोग भ्रांतियाँ फैला रहे हैं, लेकिन यह लोगों के भले के लिए है।
इस कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गश जोशी, धन सिंह रावत, सांसद नरेश बंसल, अन्य महत्वपूर्ण व्यक्ति उपस्थित रहे।
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टीम यंग्सइंडिया
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