लोक एवं जनजातीय कला प्रदर्शनी: आधुनिकता के साथ विरासत का संरक्षण आवश्यक
लोक एवं जनजातीय कला प्रदर्शनी: आधुनिकता के साथ विरासत का संरक्षण आवश्यक
कम शब्दों में कहें तो, आधुनिकता का मतलब हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भूल जाना नहीं है। यह एक ऐसा वक्त है जब हमें अपनी परंपराओं को संजोते हुए आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
देहरादून, 24 अगस्त। एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष एवं पद्मश्री प्रो. बी.के.एस. संजय ने हाल ही में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में आयोजित लोक एवं जनजातीय कला प्रदर्शनी में अपने विचार व्यक्त किए। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य न केवल इन कलाओं को प्रदर्शित करना है, बल्कि संस्कृति और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करना भी है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता का अर्थ अपनी परंपराओं को भुला देना नहीं बल्कि उन्हें संजोते हुए नया सृजन करना है।
प्रदर्शनी का उदेश्य
इस प्रदर्शनी का आयोजन युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति को एक मंच प्रदान करने के लिए किया गया था। प्रो. संजय ने युवा कलाकारों को अपने अद्वितीय दृष्टिकोण से कला में नवाचार करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सही दिशा में आगे बढ़ते हुए हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रख सकते हैं।
कला और संस्कृति का सामंजस्य
प्रो. संजय ने जोर देकर कहा कि लोक एवं जनजातीय कला में छिपी हुई हमारी पहचान है। यह केवल एक सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और ऐतिहासिक मूल्यों का प्रतिबिम्ब है। उन्होंने कहा, "हमारी कलाओं को दरकिनार करना हमारी संस्कृति के लिए हानिकारक हो सकता है, इसलिए इसे बनाए रखना आवश्यक है।"
युवाओं के लिए प्रेरणा
प्रदर्शनी में भाग ले रहे युवा कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से समाज के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि कला न केवल एक साधन है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन का एक प्रभावी माध्यम भी है। युवाओं का यह प्रयास निस्संदेह सराहनीय है।
संस्कृति का संरक्षण
आधुनिकता में परिवर्तन और विकास के साथ-साथ हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करने की आवश्यकता है। प्रो. संजय ने कहा कि हमें आज के समय में अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए उन्हें एक नया रूप देने کی आवश्यकता है। यह न केवल हमारी पहचान को उजागर करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अद्भुत धरोहर भी छोड़ेगा।
अंत में, उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपने आसपास की सांस्कृतिक धरोहर को पहचानें और उसे संरक्षित करें। हमारे देश की विविधता ही हमारी शक्ति है।
इस प्रकार, ग्राफिक एरा में आयोजित यह प्रदर्शनी एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल कला के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मददगार है बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी सहायक होगी।
बिना किसी संदेह के, यह प्रदर्शनी हमारी संस्कृति की जड़ों को भुलाए बिना आगे बढ़ने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है।
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टीम यंग्सइंडिया, स्नेहा
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