घेर-बाड़ योजना को मिली केंद्र की सहायता, सीएम धामी के प्रयासों का मिला परिणाम
घेर-बाड़ योजना को मिली केंद्र की सहायता, सीएम धामी के प्रयासों का मिला परिणाम
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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में जंगली जानवरों से किसानों की फसल बचाने के लिए किए गए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयास रंग लाने लगे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने घेर-बाड़ योजना के लिए एक बार फिर से केंद्रीय मदद देने का निर्णय लिया है, जिससे किसानों को राहत मिलेगी।
हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ चर्चा के बाद, मुख्यमंत्री ने घेर-बाड़ योजना को श्रेणी में स्वीकृति हेतु 25 करोड़ रुपये की फंडिंग की स्वीकृति दिलाई।
घेर-बाड़ योजना की आवश्यकता
उत्तराखंड में जंगली जानवरों द्वारा किसानों की फसल को भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। इसके खिलाफ कृषि विभाग ने घेर-बाड़ योजना का प्रस्ताव दिया था, जिसके तहत किसानों को अपनी फसल की सुरक्षा के लिए बाड़ लगाने में सहायता प्रदान की जाती है। तीन वर्ष पूर्व यह योजना भारतीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत चल रही थी लेकिन बाद में केंद्रीय सहायता ठप हो गई थी।
सीएम धामी का प्रयास
मुख्यमंत्री धामी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, जिला योजना के तहत सहायता प्रदान करने के लिए योजना बनाई। अब उन्हें केंद्रीय सहायता प्राप्त करने में सफलता मिली है और योजना को फिर से शुरू किया गया है। इससे तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कृषि मंत्री का बयान
विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन, कृषि मंत्री गणेश जोशी ने इस सहायता के बारे में सदन में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल ही में गौचर में आयोजित कार्यक्रम में इस विषय को केंद्रीय कृषि मंत्री के सामने रखा गया था। अब कृषि मंत्रालय ने इस संदर्भ में एक आधिकारिक पत्र भी जारी किया है।
घेर-बाड़ योजना में उपलब्धियां
पिछले तीन वर्षों में राज्य सरकार ने इस योजना के तहत 2841 हेक्टेयर जमीन में घेर-बाड़ का कार्य किया है। इस योजना का लाभ 44,429 किसानों को मिला है। कृषि मंत्री ने बताया कि इस बार के बजट में घेर-बाड़ योजना के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।
राज्य में धामी के नेतृत्व में की जा रही सहायता किसानों के लिए फायदेमंद सिद्ध होगी, जिससे वे अपनी फसल को सुरक्षित करने में सक्षम होंगे। इसके अलावा, इससे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी कदम बढ़ाया जाएगा।
हालांकि, इसमें कुछ और पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जैसे कि नियमित निगरानी और खतरे का आकलन। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना सफलतापूर्वक लागू हो सके।
अंत में, मुख्यमंत्री धामी का यह प्रयास निश्चित ही किसानों के हित में एक सकारात्मक कदम है। इसके माध्यम से अपेक्षित राहत मिलेगी जिससे की किसान अपनी मेहनत की फसल को बचा सकें।
फसल सुरक्षा के संदर्भ में इस योजना का महत्व केवल क्षणिक नहीं है, बल्कि इससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। अधिक अपडेट्स के लिए हमसे जुड़े रहें।
टीम यंग्सइंडिया, स्नेहा राठी
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