गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘हिमवंत कवि’ चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जयंती पर विशेष उत्सव
गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में ‘हिमवंत कवि’ चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जयंती पर विशेष उत्सव
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कम शब्दों में कहें तो, गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में 20 अगस्त 2026 को ‘हिमवंत कवि’ चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन हिंदी विभाग और राजभाषा प्रकोष्ठ के सहयोग से किया गया था।
कार्यक्रम की विशेषताएँ
इस अवसर पर विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में विभिन्न साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और छात्रों ने बर्त्वाल की काव्य रचनाओं पर चर्चा की। यह कार्यक्रम न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे राज्य में बर्त्वाल की काव्य धारा को पुनर्परिभाषित करने का एक प्रयास था।
‘हिमवंत कवि’ का योगदान
चंद्रकुँवर बर्त्वाल, जिन्हें ‘हिमवंत कवि’ के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड की संस्कृति और साहित्य में एक अद्वितीय स्थान रखते हैं। उनकी कविताएँ पहाड़ी जीवन, संस्कृति और प्रकृति के अनोखे चित्रण के लिए जानी जाती हैं। बर्त्वाल का साहित्य, विशेषकर उनकी कविताएँ, हमें हिमालय की सच्चाई और उसकी खूबसूरती का अनुभव कराती हैं।
विशेष उपस्थिति और चर्चा
इस कार्यक्रम में विभिन्न साहित्यकारों और विद्वानों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान यह मुद्दा उठा कि कैसे बर्त्वाल की कविताओं ने उदासीनता के समय में लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने अपने जीवन के संघर्षों और उनकी काव्य यात्रा की कहानियाँ साझा कीं।
भविष्य की योजनाएं
कार्यक्रम के समापन पर, आयोजकों ने घोषणा की कि बर्त्वाल की जयंती हर वर्ष इस प्रकार से मनाई जाएगी, ताकि नई पीढ़ी उनके साहित्य से अवगत हो सके। इसके अलावा, बर्त्वाल की रचनाओं का संग्रहण और प्रस्तुति के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जाएगा।
उपसंहार
इस विशेष कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि साहित्य संस्कृति की आत्मा है और यह हमें अपने पूर्वजों की धरोहर से जोड़ता है। ‘हिमवंत कवि’ चंद्रकुँवर बर्त्वाल की जयंती के इस विशेष उत्सव ने एक नई उम्मीद जगाई है।
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टीम यंग्सइंडिया
साक्षी शर्मा
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