उत्तराखंड हाई कोर्ट का कठोर आदेश: बच्चे का भरण-पोषण प्राथमिकता, पिता की जिम्मेदारियाँ अनिवार्य

Apr 21, 2026 - 16:30
 116  2.9k
उत्तराखंड हाई कोर्ट का कठोर आदेश: बच्चे का भरण-पोषण प्राथमिकता, पिता की जिम्मेदारियाँ अनिवार्य
उत्तराखंड हाई कोर्ट का कठोर आदेश: बच्चे का भरण-पोषण प्राथमिकता, पिता की जिम्मेदारियाँ अनिवार्य

उत्तराखंड हाई कोर्ट का कठोर आदेश: बच्चे का भरण-पोषण प्राथमिकता, पिता की जिम्मेदारियाँ अनिवार्य

Breaking News, Daily Updates & Exclusive Stories - YoungsIndia

कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पिता नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण के मामले में कर्ज या मां की आय का साधन बनाकर अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बच सकता। कोर्ट ने 8,000 रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश स्थायी रखा है और पिता की याचिका को खारिज कर दिया है।

हाई कोर्ट का निर्णय: जिम्मेदारी से बचने का कोई विकल्प नहीं

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पिता अपनी आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण से भाग नहीं सकता है। न्यायालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पिता है, तो उसकी जिम्मेदारियाँ सर्वोपरि हैं, चाहे उसकी वित्तीय स्थिति किसी भी प्रकार की हो।

भरण-पोषण का आदेश: 8,000 रुपये मासिक

कोर्ट ने यह भी कहा है कि पिता को हर महीने 8,000 रुपये अपने बच्चे के भरण-पोषण के लिए देने होंगे। हालाँकि, पिता ने इस आदेश का विरोध करते हुए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने इस बात का हवाला दिया था कि वह कर्ज में हैं और उनकी पूर्व पत्नी की आय भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को मानने से इंकार कर दिया।

इस निर्णय का व्यापक सामाजिक प्रभाव

इस प्रकार के निर्णय समाज में एक महत्वपूर्ण संदेश देते हैं कि बच्चों का भरण-पोषण केवल माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज का भी एक नैतिक दायित्व है। जब न्यायालय इस प्रकार के निर्णय सुनाते हैं, तो वे यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी बच्चे का भविष्य प्रभावित न हो।

क्या कहता है कानून?

भारतीय कानून के अनुसार, नाबालिग बच्चों का भरण-पोषण माता-पिता का कानूनी दायित्व होता है, और इस दिशा में अदालतें भी सख्त होती जा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के भरण-पोषण से संबंधित मामलों में ऐसे अनेक निर्णय सुनाए जा चुके हैं, जहां न्यायालय ने माता-पिता को अपनी जिम्मेदारियों को न केवल समझने बल्कि निभाने के लिए भी कहा है।

निर्णय का सामाजिक दृष्टिकोण

इस आदेश से न केवल न्याय का जीत होती है, बल्कि यह समाज को भी एक सकारात्मक दिशा में प्रेरित करने का कार्य करती है। बच्चों के भविष्य के प्रति समाज की जिम्मेदारी का एहसास कराना एक महत्वपूर्ण कार्य है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड हाई कोर्ट का यह निर्णय न केवल न्यायिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में बच्चों के अधिकारों और उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी के प्रति भी जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। सावधानी रहे कि बच्चे का भविष्य उनकी जिम्मेदारियों को समझने से ही सुरक्षित हो सकता है।

अधिक अपडेट के लिए, कृपया हमारी वेबसाइट पर विजिट करें: YoungsIndia

टीम यंग्सइंडिया, साक्षी शर्मा द्वारा

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0