देहरादून: ग्राफिक एरा अस्पताल में पार्किंसंस का सफल इलाज, ब्रेन में पेसमेकर से मिली नई उम्मीद

May 8, 2026 - 16:30
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देहरादून: ग्राफिक एरा अस्पताल में पार्किंसंस का सफल इलाज, ब्रेन में पेसमेकर से मिली नई उम्मीद
देहरादून: ग्राफिक एरा अस्पताल में पार्किंसंस का सफल इलाज, ब्रेन में पेसमेकर से मिली नई उम्मीद

देहरादून: ग्राफिक एरा अस्पताल में पार्किंसंस का सफल इलाज, ब्रेन में पेसमेकर से मिली नई उम्मीद

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कम शब्दों में कहें तो, ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक नए उपचार के माध्यम से पार्किंसंस रोग का सफल इलाज किया है।

देहरादून, 7 मई। उत्तराखंड की राजधानी में स्थित ग्राफिक एरा अस्पताल के विशेषज्ञों ने एक बुजुर्ग मरीज के ब्रेन में पेसमेकर लगाकर पार्किंसंस रोग का सफल इलाज करने में सफलता पाई है। इस चिकित्सीय प्रक्रिया को 'डीप ब्रेन स्टिमुलेशन' (DBS) कहा जाता है, जिसमें एक इलेक्ट्रोड को मस्तिष्क में इम्प्लांट किया जाता है, जिससे गति नियंत्रण में सुधार और अन्य लक्षणों में कमी आती है।

क्या है पार्किंसंस रोग?

पार्किंसंस रोग एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो मस्तिष्क के मोटर सिस्टम को प्रभावित करता है। इससे प्रभावित व्यक्तियों को शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई, अनियंत्रित हिलना, और मांसपेशियों की कठोरता जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये लक्षण समय के साथ बढ़ सकते हैं।

पेसमेकर से पार्किंसंस का इलाज

ग्राफिक एरा अस्पताल में की गई इस नवीनतम चिकित्सा प्रक्रिया में, डॉक्टरों ने मस्तिष्क में एक पेसमेकर स्थापित किया। इससे ब्रेन की गतिविधियों को नियंत्रित करने में मदद मिली, जिससे पार्किंसंस के लक्षणों में सुधार हुआ। इस प्रकार के सफल उपचार से और भी कई मरीजों को लाभ मिल सकता है और यह चिकित्सा क्षेत्र में एक नई दिशा दे सकता है।

विशेषज्ञों की राय

अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख, डॉ. आरती मेहता ने कहा, "यह एक बहुत ही सफल प्रक्रिया है और इससे यह सिद्ध होता है कि दवा के साथ-साथ तकनीकी उपायों का भी प्रयोग किया जा सकता है। हमने इस पेसमेकर तकनीक के माध्यम से मरीज की गुणवत्ता जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।"

उपचार के लाभ

इस उपचार के बाद मरीज में बेहतर गतिविधियों की क्षमता देखने को मिली है। इस प्रक्रिया से न केवल पार्किंसंस के लक्षणों में कमी आई है, बल्कि मरीज की मानसिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।

भविष्य की दिशा

ग्राफिक एरा अस्पताल का यह प्रयास अन्य चिकित्सा संस्थानों के लिए एक मिशाल प्रस्तुत करता है। यही नहीं, इससे यह भी प्रतीत होता है कि भविष्य में और अधिक तकनीकी उपचार विकल्पों का उपयोग किया जा सकता है।

इस अद्वितीय चिकित्सीय प्रक्रिया से प्रेरित होकर, अन्य अस्पतालों में भी इस तरह के सफल उपचार को अपनाने की संभावना बढ़ गई है।

इस घटना ने न केवल पार्किंसंस रोग की नई दिशा को प्रस्तुत किया है, बल्कि मरीजों के लिए आशा की एक नई किरण भी दिखाई है।

अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकें अब जरूरतमंद मरीजों के स्वास्थ्य में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके अलावा, अस्पताल के विशेषज्ञों ने इस सफलता को अनुसंधान और विकास के लिए प्रेरणा स्रोत माना है। इससे आगामी वर्षों में और भी नये उपचार विकसित होने की संभावना है।

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टीम यंग्सइंडिया

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