ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में हुआ शानदार शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 'हिमप्रवाह 2.0', बेस्ट फिल्म का खिताब 'इकोज़ ऑफ द माउंटेन' ने जीता
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में 'हिमप्रवाह 2.0' शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल का आयोजन
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कम शब्दों में कहें तो, 'इकोज़ ऑफ द माउंटेन' ने 'हिमप्रवाह 2.0' शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार जीता। यह त्योहार देहरादून के ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में 14 अक्टूबर को सम्पन्न हुआ।
फेस्टिवल की खास बातें
इस दो दिवसीय शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल 'हिमप्रवाह 2.0' का आयोजन मुख्यतः युवा filmmakers को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया था। इसमें विभिन्न प्रकार की शॉर्ट फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर आधारित थीं। इस फेस्टिवल में देशभर के कई कॉलेज और विश्वविद्यालयों के प्रतिभागियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
'इकोज़ ऑफ द माउंटेन' की कहानी
'इकोज़ ऑफ द माउंटेन' एक भावनात्मक शॉर्ट फिल्म है, जिसमें पर्वतीय जीवन की खुबसूरती और चुनौतियों को दर्शाया गया है। फिल्म के निर्देशक ने पूर्व में भी कई पुरस्कार जीते हैं, और इस बार उन्होंने अपनी फिल्म के माध्यम से पर्वत के संसाधनों और वहां के निवासियों की संघर्ष कहानी को बेहतरीन तरीके से पेश किया।
मुख्य अतिथियों की उपस्थिति
फेस्टिवल में कई प्रमुख फिल्मकार, निर्देशक और सिनेमा के विशेषज्ञ उपस्थित थे। उन्होंने शॉर्ट फिल्मों के महत्व पर चर्चा की और युवाओं को अपनी सोच को सिनेमा के माध्यम से व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। फेस्टिवल के दौरान वार्तालाप सत्र आयोजित किए गए, जिसमें शोकेस की गई फिल्मों पर विचार-विमर्श किया गया।
युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर
इस प्रकार के फेस्टिवल्स युवाओं को अपनी प्रतिभा को दिखाने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करते हैं। फिल्म निर्माण के प्रति उत्साही विद्यार्थियों ने इस आयोजन का भरपूर लाभ उठाया और अपने विचारों को एक नया आकार दिया।
निष्कर्ष
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी में आयोजित 'हिमप्रवाह 2.0' शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि यह नए फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करने और उनकी कला को मान्यता देने का एक साधन भी बना। ऐसे आयोजनों की आवश्यकता है ताकि हमारे युवा अपनी सोच को एक नए आयाम में प्रस्तुत कर सकें।
युवाओं के लिए अवसरों की इस कमी को पूरा करने के लिए, हमें इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिए। आगे चलकर, हम इसी तरह के और फेस्टिवल्स की उम्मीद कर सकते हैं, जो नई प्रतिभाओं को आगे लाने में सहायक साबित होंगे।
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टीम यंग्सइंडिया
संध्या शर्मा
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