गंगा उत्सव: जनजागरूकता के प्रमुख संदेश के साथ भव्य आयोजन सम्पन्न
गंगा उत्सव: जनजागरूकता के प्रमुख संदेश के साथ भव्य आयोजन सम्पन्न
कम शब्दों में कहें तो, ऋषिकेश में गंगा उत्सव का आयोजन एक सफल पहल रही, जहाँ नमामि गंगे प्रकोष्ठ ने जनजागरूकता का विशेष संदेश लोगों के बीच पहुँचाया।
ऋषिकेश के पण्डित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में हुआ यह आयोजन, राज्य गंगा स्वच्छता मिशन के तहत आयोजित किया गया था। मुख्य उद्देश्य गंगा नदी की सफाई और संरक्षण के प्रति समुदाय में जागरूकता बढ़ाना था। इस कार्यक्रम में अनेक सक्रियताएँ और जागरूकता अभियान शामिल थे, जो स्थानीय निवासियों को गंगा की महत्वपूर्णता और उसकी सफाई के प्रति सजग करने हेतु थे।
गंगा उत्सव का महत्व
गंगा नदी भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। न केवल यह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह देश की पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए, नमामि गंगे प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित यह उत्सव, एक संदेश के रूप में है कि गंगा की रक्षा और स्वच्छता केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम का आयोजन
कार्यक्रम का उद्घाटन क्षेत्रीय नेताओं और विशेषज्ञों की उपस्थिति में हुआ। श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय परिसर में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें नृत्य, गीत और संवाद शामिल थे। देशभर के अनेक विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भी भाग लिया, जिन्होंने गंगा के संरक्षण पर अपने विचार साझा किए।
जनजागरूकता के लिए महत्वपूर्ण कदम
इस आयोजन के दौरान नमामि गंगे प्रकोष्ठ की ओर से प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें गंगा की स्थिति और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर जानकारी प्रस्तुत की गई। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे कई स्वयंसेवी संगठनों ने भी अपनी भागीदारी दिखाई, जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ
कार्यक्रम के अंत में, उपस्थित लोगों ने गंगा के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझा और इसके संरक्षण के लिए संकल्प लिया। स्थानीय निवासियों और छात्रों ने इस उत्सव की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम नियमित होने चाहिए ताकि हर कोई गंगा की महत्वपूर्णता को समझ सके।
गंगा उत्सव का यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक संजीवनी बना, बल्कि यह एक साहसिक पहल के रूप में विकसित हुआ, जो सभी के लिए प्रेरणादायक था। भविष्य में भी इस प्रकार की पहलों की आवश्यकता है ताकि गंगा को उसकी वास्तविक पहचान और महत्व वापस मिल सके।
भव्य आयोजन के इस अवसर पर, नमामि गंगे प्रकोष्ठ ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि जागरूकता और सामूहिक प्रयास ही गंगा की स्वच्छता का प्रमुख साधन हैं।
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टीम यंग्सइंडिया
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