उत्तराखंड स्थापना दिवस: पहाड़ में आक्रोश का कारण और आंदोलन की सच्चाई

Nov 9, 2025 - 16:30
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उत्तराखंड स्थापना दिवस: पहाड़ में आक्रोश का कारण और आंदोलन की सच्चाई
उत्तराखंड स्थापना दिवस: पहाड़ में आक्रोश का कारण और आंदोलन की सच्चाई

उत्तराखंड स्थापना दिवस पर फहराया गया आक्रोश का ध्वजा

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कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड की रजत जयंती पर जहां एक ओर जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी ओर पहाड़ी क्षेत्रों में लोग धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं। जानिए इस विशेष दिन पर आंदोलन करने का कारण क्या है।

उत्तराखंड की स्थापना: एक ऐतिहासिक पल

उत्तराखंड राज्य 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना। आज, 25 वर्षों के इस महत्वपूर्ण अवसर पर, उत्तराखंड के नागरिक अपने राज्य की उपलब्धियों को तो मना रहे हैं, लेकिन कुछ समुदायों का एक बड़ा हिस्सा अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत है।

आंदोलन का कारण

इस साल स्थापना दिवस पर कई पहाड़ी जनपदों में लोग सचेत करने के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का मुख्य मुद्दा उनका श्रमिक अधिकारों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं हैं। राज्य सरकार की नीतियों के परिणामस्वरूप, कई गांवों के निवासी विकास से वंचित रह गए हैं।

समाज का विभाजन: एक गहरी खाई में

कई लोगों का मानना है कि राज्य की रजत जयंती पर इस प्रकार के आंदोलन, विकास कार्यों की कमी के कारण हुए हैं। कुछ क्षेत्रों में सरकार द्वारा किए गए वादे अधूरे रह गए हैं, जिससे लोगों में निराशा और आक्रोश बढ़ रहा है।

आंदोलन का स्वरूप

धरना-प्रदर्शन का आलम ऐसा है कि विभिन्न संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज ऊँची की है। कुछ स्थानों पर लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपने हक के लिए नारेबाजी की। महिलाओं, युवाओं और बच्चों सहित सभी वर्गों के लोग इसमें शामिल हो रहे हैं।

आगे का रास्ता

राज्य सरकार को अब इन आंदोलनों को गंभीरता से लेना होगा। यह माना जा रहा है कि सिर्फ विकास योजनाओं का प्रचार नहीं, बल्कि उनकी सही नीतियों का पालन करना भी आवश्यक है।

आखिरकार, इस स्थापना दिवस की खुशी और गर्व के पल को और भी यादगार बनाया जा सकता है, यदि सरकार पहाड़ी क्षेत्र की आवाज को गंभीरता से सुनेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

निष्कर्ष

इस वर्ष उत्तराखंड की स्थापना दिवस न केवल जश्न का दिन है, बल्कि अधिकारों की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रहे ये आंदोलन एक संकेत है कि संतोषजनक विकास के लिए लोगों की आवाज़ को सुनना और समझना ज़रूरी है।

उत्तराखंड की स्थापना दिवस पर हो रहे आंदोलनों को समझने के लिए और अधिक जानकारी के लिए, कृपया यहां क्लिक करें.

टीम यंग्सइंडिया, साक्षी शर्मा

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