उत्तराखंड : अधूरी पेयजल योजनाओं पर डीएम की सख्ती, समीक्षा बैठक में लिए अहम निर्णय!
उत्तराखंड : अधूरी पेयजल योजनाओं पर डीएम की सख्ती
कम शब्दों में कहें तो, उत्तराखंड में पेयजल योजनाओं की स्थिति को खोलते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्थानीय बैठक में सख्ती दिखाई है।
हल्द्वानी : हाल ही में जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में "जिला जल एवं स्वच्छता मिशन नैनीताल" की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कालाढुंगी के विधायक बंशीधर भगत और लालकुआं के विधायक मोहन सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे, जहां राज्य में चल रहे पेयजल समीक्षाओं पर चर्चा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य
बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल 152 कार्यों का जिक्र किया गया, जो बजट के अभाव के कारण अधूरे पड़े हुए हैं। नोडल जल जीवन मिशन के प्रतिनिधि विशाल सक्सेना ने स्पष्ट किया कि यह योजनाएं जल्द से जल्द पूर्ण की जाएंगी। इसके लिए ग्रामीण पाइपलाइन पेयजल योजनाओं की आईडी भी शीघ्र बनाई जाएगी, जिससे सभी कार्यों को सही समय पर पूरा किया जा सके।
बजट की आवश्यकता
ज़ाहिर है, जन जीवन में जल के अभाव का सामना करने वाली जनसंख्या के लिए यह एक गंभीर मुद्दा है। अधूरे कार्यों की सच्चाई यह दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं को तुरंत क्रियान्वित करने की आवश्यकता है ताकि राज्य के प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल मिल सके। बैठक में निर्णय लिया गया कि संबंधित अधिकारियों को तात्कालिक रूप से बजट संबंधी दिशा-निर्देश दिए जाएंगे ताकि कोई भी योजना अधूरी न रह सके।
जनता की भागीदारी
यह बैठक वास्तव में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सहभागिता के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी गांव या क्षेत्र बिना पेयजल के न रहे। स्वच्छता मिशन के अंतर्गत की जाने वाली योजनाओं की समयबद्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। इसके लिए विधायक बंशीधर भगत और मोहन सिंह बिष्ट ने भी अधिकारियों से आवश्यक माध्यमों के लिए चर्चा की।
इसके अलावा, जल जीवन मिशन में हुई प्रगति की निगरानी भी आवश्यक बताई गई। इसकी रिपोर्ट हर महीने बनाई जाएगी, ताकि योजना की स्थिति का पता चल सके।
क्या हैं इंतज़ाम?
राज्य सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। हालाँकि, बजट की कमी से विकास प्रभावित हो रहा है। इसलिए, अधिकारी हर किसी योजना की प्रगति को गंभीरता से लेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे।
बैठक के अंत में यह संकल्प लिया गया कि भविष्य में ऐसी समीक्षा बैठकें नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी ताकि परियोजनाओं की अधूरी स्थिति का समाधान किया जा सके। जन प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के बीच सहयोग और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इस बैठक की परिणामस्वरूप, जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है, और इसे किसी भी परिस्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
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स्थानीय प्रशासन की देखरेख में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक गांव में लोगों को पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल मिले। इसके लिए बजट व कार्य योजना को समय पर लागू करने का आग्रह किया गया है।
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टीम यंग्सइंडिया, अनुभा शर्मा
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