आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का तीव्र आंदोलन: डोईवाला तहसील में प्रदर्शन, 30 अक्टूबर को सचिवालय घेराव की चेतावनी!
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का तीव्र आंदोलन: डोईवाला तहसील में प्रदर्शन, 30 अक्टूबर को सचिवालय घेराव की चेतावनी!
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कम शब्दों में कहें तो, देहरादून के डोईवाला तहसील में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने उत्पीड़न और कम मानदेय के खिलाफ एक महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया। इस आंदोलन का नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष सुशीला खत्री ने किया और कार्यकत्रियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे 30 अक्टूबर को सचिवालय का घेराव करेंगी।
प्रदर्शन का उद्देश्य
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाँ, जो समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लंबे समय से कम मानदेय और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठा रही हैं। यह प्रदर्शन उनके अधिकारों और सम्मान की बहाली की दिशा में एक कदम है।
न्यूनतम मानदेय की मांग
कार्यकत्रियों का कहना है कि उनके कार्य का महत्व तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन उनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं की गई है। उनके अनुसार, उनके पास अतिरिक्त काम का दबाव है, जिसके कारण वे मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि सरकार उनके मानदेय में उचित वृद्धि करे ताकि वे अपने जीवन स्तर को बेहतर बना सकें।
आंदोलन की योजनाएँ
सुशीला खत्री के नेतृत्व में, कार्यकत्रियों ने तहसील कार्यालय के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगों के प्रति दृढ़ता से अपनी आवाज उठाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर उनकी उपेक्षा जारी रही, तो 30 अक्टूबर को सचिवालय का घेराव किया जाएगा। यह एक बड़ा कदम है जो दर्शाता है कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियाँ अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं।
समाज का समर्थन
इस प्रदर्शन को समाज के कई तबकों से समर्थन मिल रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने इस आंदोलन का समर्थन किया है और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ एकजुटता दिखाई है। उनका मानना है कि यह लड़ाई केवल आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की नहीं है, बल्कि सभी महिलाओं और श्रमिकों की एकजुटता की लड़ाई है।
सरकार की ओर से प्रतिक्रिया
हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई है। शासन की ओर से सरकार को चाहिए कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मांगों के समाधान के लिए विचार करे। उनकी सामाजिक और मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, सरकार को तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
निष्कर्ष
आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का प्रदर्शन डोईवाला तहसील में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की लड़ाई है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 30 अक्टूबर को सचिवालय का घेराव एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकता है। इसलिए सभी को इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए और उनकी पुकार को सुनना चाहिए।
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टीम यंग्सइंडिया
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