उत्तराखंड: 109 गांवों को रेड जोन में चिन्हित किया गया, सुरक्षा के लिए फेंसिंग और सोलर लाइट का उपयोग

Aug 21, 2026 - 16:30
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उत्तराखंड: 109 गांवों को रेड जोन में चिन्हित किया गया, सुरक्षा के लिए फेंसिंग और सोलर लाइट का उपयोग
उत्तराखंड: 109 गांवों को रेड जोन में चिन्हित किया गया, सुरक्षा के लिए फेंसिंग और सोलर लाइट का उपयोग

उत्तराखंड में 109 गांवों को रेड जोन में चिन्हित किया गया

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कम शब्दों में कहें तो, नैनीताल में 109 गांवों को रेड जोन के तहत चिन्हित किया गया है, जहाँ अब फेंसिंग और सोलर लाइट के माध्यम से सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।

नैनीताल जिला प्रशासन ने मानव-वन्यजीव संघर्ष पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिले में वन्यजीवों के लगातार हमले और इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए, 109 गांवों को रेड जोन के रूप में चिह्नित किया गया है। इन गांवों में अब स्थानीय निवासियों की जान-माल और किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण चैनलिंग फेंसिंग एवं सोलर लाइटों का उपयोग किया जाएगा।

रेड जोन के तहत गांवों की सूची

नैनीताल जिले में उन गांवों को प्राथमिकता दी गई है जो वन्यजीवों के हमलों से अधिक प्रभावित रहे हैं। ये गांव न केवल स्थानीय निवासियों के लिए बल्कि कृषि उत्पादन के लिए भी खास महत्व रखते हैं। इन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए निर्माण कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।

फेंसिंग और सोलर लाइट का महत्त्व

फेंसिंग और सोलर लाइट का उपयोग करने से ना केवल गांवों की सुरक्षा में इजाफा होगा, बल्कि यह वन्यजीवों के आवागमन पर नियंत्रण भी स्थापित करेगा। फेंसिंग की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी ताकि वह वन्यजीवों को गांवों में प्रवेश करने से रोक सके। वहीं, सोलर लाइटों की स्थापना रात के समय में सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके।

नैनीताल प्रशासन के प्रयास

डीएम नैनीताल ने इस योजना की पुष्टि की और कहा कि यह निर्णय स्थानीय समुदाय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। यह कदम वन्यजीवों के साथ मानव संघर्ष को कम करने के अलावा, किसानों को भी उनके उत्पादन में सुरक्षा प्रदान करेगा।

स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

स्थानीय निवासियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने आशा जताई है कि इससे उनकी सुरक्षा में सुधार होगा और वे बिना किसी भय के अपनी कृषि गतिविधियों को जारी रख सकेंगे। कई ग्रामीणों ने साझा किया कि पहले उन्हें वन्यजीवों के हमलों का सामना करना पड़ा था, जिससे उनकी फसलें और जीवन प्रभावित हुए थे।

इस पूरे मामले पर आगे की जानकारी के लिए, यहाँ क्लिक करें.

टीम यंग्सइंडिया

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